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भीलवाड़ा/ माणिक्यलाल वर्मा टेक्सटाइल एवं इंजीनियरिंग कॉलेज के टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी विभाग की ओर से पांच दिवसीय ऑनलाइन फेकल्टी डेवलेपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया गया। प्रोग्राम का विषय ष्थ्नदबजपवदंस ंदक ैनेजंपदंइसम ज्मगजपसमे रू थ्नजनतम ज्तमदके ंदक प्ददवअंजपवदेष् था। इसमें विभिन्न विशेषज्ञों ने अपनी विशेष अंतर्दृष्टि साझा की और टेक्सटाइल उद्योग में हो रहे नवाचारों पर चर्चा की।
पहले दिन, प्रोफेसर बी. के. बेहरा, ज्प्ज्े भिवानी ने 3डी वीविंग का उपयोग करते हुए फैब्रिक कंपोजिट विकास पर चर्चा की। इसके बाद, डा. सौम्या चौधरी ने टेक्सटाइल-रीइंफोर्स्ड कंपोजिट्स के निर्माण पर एक प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
दूसरे दिन, प्रोफेसर राजीव के. वार्ष्णेय ने टेक्सटाइल में उभरते रुझानों पर प्रकाश डाला। डा. विजय बाहेती ने टेक्सटाइल वेस्ट को उच्च सामग्री में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पर चर्चा की। डा. सुजीत गुल्हाने ने समुद्री शैवाल के माध्यम से पर्यावरणीय दृदृष्टिकोण से अनुकूल वस्त्रों के निर्माण के बारे में बताया और प्रोफेसर अमित रावल ने नॉनवोवन तकनीक के विविध अनुप्रयोगों का परिचय दिया।
तीसरे दिन, डा. कामेश्वर राव ने सुपर एब्सोर्बेंट फाइबर के उन्नत अनुप्रयोगों पर चर्चा की, जबकि डा सुमित शर्मा, यूनिवर्सिटी ऑफ बोरास, स्वीडन ने नए उत्पादों के विकास के महत्व पर जोर दिया। श्री विनोद पुरोहित ने टेक्सटाइल गुणवत्ता सर्कल के महत्व को समझाया और डा. बिभु प्रसाद दास ने टेक्सटाइल क्षेत्र में सस्टेनेबिलिटी के अनुप्रयोग और उनकी प्रासंगिकता’ पर जोर दिया।
चौथे दिन, प्रोफेसर अनुपम कुमार ने जैविक टेक्सटाइल के इको सिस्टम पर प्रभाव की चर्चा की। डा.पतंजल कुमार ने स्थायी टेक्सटाइल आपूर्ति श्रृंखला में रणनीतिक समन्वय पर प्रकाश डाला, जबकि डा. अजय कुमार ने भारतीय ऊन में स्थायी मूल्य संवर्धन के तरीकों पर चर्चा की। दिन का समापन डा. नंदन कुमार के सुरक्षात्मक वस्त्रों के व्याख्यान के साथ हुआ।
सम्मेलन के अंतिम दिन, विशेषज्ञों ने टेक्सटाइल उद्योग में नवीनतम नवाचारों पर चर्चा जारी रखी। डा. ललित जाजपुरा ने अल्ट्रासाउंड तकनीक के अनुप्रयोग पर प्रकाश डाला, जबकि डा. मुकेश बाजया ने बैलिस्टिक अनुप्रयोगों के लिए टेक्सटाइल की भूमिका की व्याख्या की। डा. सी. आर. मीना ने फैशन उद्योग में नवाचारी दृष्टिकोण और स्थायित्व पर विचार साझा किए। समापन में, डा. प्रकाश खुडे ने सुरक्षात्मक वस्त्रों के महत्व और उनकी उन्नति पर जोर दिया।
समापन समारोह में, टेक्सटाइल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.अरविंद वशिष्ठ द्वारा राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एस के सिंह एवं सभी वक्ताओं का सम्मान किया गया और इस कार्यक्रम को सफल बनाने में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
यह पाँच दिवसीय कार्यक्रम न केवल नवीनतम तकनीकी और रचनात्मक प्रवृत्तियों को उजागर करने में सहायक रहा, बल्कि टेक्सटाइल उद्योग को एक नया दृष्टिकोण भी प्रदान करने में सफल रहा। इस प्रोग्राम के समन्वयक डॉक्टर हर्षवर्धन सारस्वत रहे।
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