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सूरत/ जो देश का प्रमुख सिंथेटिक कपड़ा हब माना जाता है, एक बार फिर श्रमिक आंदोलन के कारण चर्चा में है। शहर के वीविंग सेक्टर में कार्यरत लगभग 15,000 मजदूरों ने वेतन वृ(ि की मांग को लेकर अचानक हड़ताल शुरू कर दी है। इस हड़ताल के चलते सूरत के विभिन्न औद्योगिक इलाकों में स्थित करीब 1,500 वीविंग यूनिटों का उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया है, जिससे कपड़ा उद्योग की सप्लाई चेन पर असर पड़ने लगा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मजदूरों की प्रमुख मांग है कि मौजूदा महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए वेतन में यथोचित बढ़ोतरी की जाए। मजदूर संगठनों का कहना है कि बीते काफी समय से वेतन में कोई ठोस संशोधन नहीं हुआ है, जबकि किराया, भोजन, बिजली और अन्य आवश्यक खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में मौजूदा वेतन पर गुजारा करना मुश्किल होता जा रहा है।
हड़ताल का असर मुख्य रूप से ग्रे फैब्रिक और सिंथेटिक कपड़ों के उत्पादन पर पड़ा है। कई यूनिटों में करघे पूरी तरह बंद पड़े हैं, जिससे दैनिक उत्पादन लाखों मीटर कपड़े तक घट गया है। व्यापारियों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबी चली तो डिलीवरी शेड्यूल, निर्यात ऑर्डर और घरेलू सप्लाई पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
उद्योग सूत्रों के अनुसार यूनिट मालिक और मजदूर प्रतिनिधियों के बीच बैठकों का दौर जारी है, लेकिन फिलहाल किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन पाई है। यूनिट मालिकों का तर्क है कि पिछले कुछ महीनों से बाजार में ग्राहकी कमजोर है, कपड़े के भाव दबाव में हैं और लागत पहले ही बढ़ चुकी है। ऐसे में एकमुश्त बड़ी वेतन वृ(ि उद्योग के लिए कठिन साबित हो सकती है।
वहीं, टेक्सटाइल विशेषज्ञों का मानना है कि सूरत जैसे बड़े कपड़ा केंद्र में श्रम असंतोष का असर केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरे देश के टेक्सटाइल बाजार पर पड़ता है। खासतौर पर आगामी शादी-विवाह और लग्न सीजन को देखते हुए उत्पादन में रुकावट चिंता का विषय बन सकती है।
फिलहाल सभी की नजरें मालिकदृमजदूर वार्ता पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला, तो यह हड़ताल सूरत के वस्त्र उद्योग के लिए आर्थिक नुकसान और बाजार में अस्थिरता का कारण बन सकती है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए कोई मध्य मार्ग निकलकर कामकाज फिर से सामान्य होगा।
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