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भारतदृओमान व्यापार समझौता
By Textile Mirror - 06-01-2026

टेक्सटाइल उद्योग के लिए बड़ा मौका
नई दिल्ली/ और ओमान ने एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता  पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को नई दिशा देने वाला बताया जा रहा है। यह समझौता भारत की मध्य पूर्व में व्यापार विस्तार रणनीति का एक अहम हिस्सा है और इसका लाभ विशेष रूप से ‘टेक्सटाइल, गहनों, फार्मा और एमएसएमई से जुड़े क्षेत्रों को मिल सकता है। 
क्या है यह समझौता?
ओमान ने भारत को अपने बाजार में 98.08 प्रतिशत वस्तुओं पर शून्य आयात शुल्क  देने की पेशकश की है, जिससे भारत की कुल निर्यात का लगभग 99.38 प्रतिशत मूल्य ओमान में शुल्क-रहित पहुंच सकेगा। इसके तहत कई श्रमिक-गहन सेक्टर, जैसे टेक्सटाइल, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग उत्पाद और कृषि वस्तुएँ, सीधे कस्टम शुल्क में छूट पाएंगे। 
भारत ने बदले में अपने लगभग 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों में शुल्क में ढील देने का प्रस्ताव रखा है, जो ओमान से आयातित सामान पर लागू होगा। इसके बावजूद भारत ने कुछ संवेदनशील उत्पादों को समझौते से बाहर रखा है ताकि घरेलू उद्योगों को संरक्षण मिले। 
टेक्सटाइल उद्योग के लिए क्या मायने रखता है?
टेक्सटाइल भारत के निर्यात का एक अहम हिस्सा है और लाखों श्रमिकों को रोज़गार देता है। इस समझौते से भारत के कपड़ा, तैयार-मल और बुनाई उद्योग को ओमान तथा खाड़ी-अफ्रीका क्षेत्र में कम लागत और बेहतर प्रतिस्पर्धा मिलने की उम्मीद है।
- शून्य शुल्क पहुंच से भारतीय वस्त्र ओमान में सस्ते दाम पर बिक सकेंगे।
- इससे नया ऑर्डर, उत्पादन बढ़ना और निर्यात में विस्तार होने की संभावना है।
- छोटी और मध्यम टेक्सटाइल इकाइयाँ, जो पहले महंगे शुल्क से दबाव में थीं, अब नई बाजारों में प्रवेश कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत की निर्यात विविधीकरण रणनीति में एक बड़ा कदम है, खासकर तब जब वैश्विक व्यापार में भारी टैरिफ दबाव है। 
कुल असर और आगे की दिशा
सरकारी और उद्योग दोनों स्तरों पर उम्मीद जताई जा रही है कि यह समझौता अगले 2-3 वर्षों में भारत के निर्यात में लगभग 2-3 अरब डॉलर का इज़ाफ़ा कर सकता है, जिससे भारत-ओमान दो-तरफ़ा व्यापार को सुदृढ़ किया जा सकेगा। समझौते को लागू करने की प्रक्रिया अगले 3 महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य है। 
विशेष रूप से टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए यह समझौता प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त, अधिक ऑर्डर और निर्यात विस्तार का नया अवसर प्रदान करता है। एमएसएमई और छोटे निर्यातकों को भी अब पूर्व की तुलना में बेहतर बाजार पहुंच और व्यापारिक अवसर मिलेंगे, जिससे रोजगार और उत्पादन दोनों में वृ(ि संभव है।

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