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टेक्सटाइल सेक्टर में निवेश, स्किलिंग और तकनीक पर केंद्रित रणनीति
नई दिल्ली/भारत का टेक्सटाइल क्षेत्र एक नए विकास पथ पर अग्रसर है, जहां निर्माण ;मैन्युफैक्चरिंगद्ध और निर्यात ;एक्सपोर्टद्ध दोनों मोर्चों पर उल्लेखनीय तेजी देखी जा रही है। केंद्र सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा की गई रणनीतिक पहलों, निवेश प्रोत्साहनों, कौशल विकास योजनाओं और तकनीकी नवाचारों के चलते यह क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से उभर रहा है।
वस्त्र मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024दृ25 की पहली तिमाही में भारत के वस्त्र और परिधान निर्यात में 12 प्रतिशत की वृ(ि दर्ज की गई है, जबकि घरेलू विनिर्माण इकाइयों में औसतन 18 प्रतिशत उत्पादन क्षमता बढ़ी है। गुजरात, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स चालू हो चुके हैं।
वस्त्र मंत्रालय के सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने कहा कि भारत का टेक्सटाइल सेक्टर केवल उत्पादन नहीं, बल्कि वैश्विक वैल्यू चेन में एक निर्णायक भूमिका निभा रहा है। हमारी प्राथमिकता स्किलिंग, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और एमएसएमई सेक्टर को सपोर्ट करना है।
सरकार द्वारा पीएम मित्रा मेगा टेक्सटाइल पार्क, त्वक्ज्म्च् योजना, और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड स्कीम जैसे कार्यक्रमों से उद्योग को नई दिशा मिली है। इसके साथ ही राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन के तहत 3.5 लाख से अधिक टेक्सटाइल श्रमिकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
नवीन तकनीकों जैसे ऑटोमेटेड लूम्स, प्वज् आधारित उत्पादन नियंत्रण, और डिजिटल डिजाइनिंग से भारतीय निर्माताओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पकड़ और मजबूत हुई है।
टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष के अनुसार अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों से आने वाले ऑर्डर में 2025 की पहली छमाही में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। भारत अब स्थिरता और गुणवत्ता के पैमाने पर वैश्विक खरीदारों की पहली पसंद बन रहा है।
भारत का वस्त्र क्षेत्र अब केवल परंपरा नहीं बल्कि तकनीकी और आर्थिक सामर्थ्य का प्रतीक बन चुका है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र रोजगार, निर्यात और नवाचार का प्रमुख इंजन बनने जा रहा है।