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इचलकरंजी/ स्थानीय टेक्सटाइल सेंटर में यार्न की कीमतों में उछाल-गिरावट और बिजली का अतिरिक्त बोझ दो महत्वपूर्ण कारक थे, जो यंत्रमागधारकों को भारी परेशान करते थे। चार साल पहले कपास की कीमतों में बड़ा उछाल आया था, जिसके परिणामस्वरूप यार्न की कीमतों में वृ(ि हुई थी, कभी-कभी प्रति किलोग्राम यार्न प्रति दिन चार से पांच रुपये तक बढ़ जाती थी। पिछले कुछ महीनों से कपास की कीमतों में गिरावट के कारण सूत की कीमतों में भी कमी आई है, जिसका सीधा प्रभाव सूत की कीमतों पर पड़ा है। सूत की कीमतों में स्थिरता और बिजली पर अतिरिक्त छूट का लाभ इचलकरंजी के कपड़ा उद्योग को राहत देने वाला साबित हुआ है। वर्तमान में सूत बाजार स्थिर है, जिसका लाभ यंत्रमागधारकों को निश्चित रूप से मिल रहा है।
बिजली दरों का अतिरिक्त बोझ यंत्रमागधारकों को आर्थिक संकट में डालने वाला और व्यवसाय को अस्थिर करने वाला साबित हो रहा था। सरकार के दरबार में बिजली छूट की मांग लगातार की जा रही थी, जिस पर राज्य सरकार ने सकारात्मक निर्णय लेते हुए 27 अश्वशक्ति से कम के यंत्रमागधारकों को एक रुपये प्रति यूनिट और 27 अश्वशक्ति से अधिक के यंत्रमाग धारकों को 75 पैसे प्रति यूनिट की अतिरिक्त छूट देने का निर्णय लिया है और इसका क्रियान्वयन भी शुरू हो चुका है। कुल मिलाकर इन दोनों बातों का सकारात्मक प्रभाव इचलकरंजी के कपड़ा उद्योग पर पड़ा है और यंत्रमागधारकों के उत्पादन लागत में कुछ हद तक कमी आई है। उत्पादन लागत में कमी आने से बाजार में प्रतिस्पर्धा में इचलकरंजी के कपड़े टिकने में मदद मिली है और कपड़े की मांग में भी अच्छी वृ(ि हुई है। कम से कम इस कारण से इचलकरंजी के कपड़ा उद्योग में स्थिरता आई है।
वर्तमान में इचलकरंजी के स्थानीय सूत बाजार में 30, 32, 34, 40 और 60 काउंट के सूत का बड़े पैमाने पर कपड़ा बुनाई के लिए उपयोग किया जा रहा है। हर सप्ताह में पूरे देश में से इचलकरंजी शहर में लगभग 200 से 225 ट्रक सूत की आवक होती है, जो कि लगभग ढाई सौ टन यानी 24 से 25 लाख किलोग्राम विभिन्न प्रकार के सूत शहर में आता है। इससे सूत बाजार में करोड़ों रुपये की आर्थिक गतिविधि होती है।
शहर और आस-पास के क्षेत्र में फैले यंत्रमागों पर विचार करें तो प्रतिदिन लगभग डेढ़ करोड़ मीटर कपड़ा शहर के यंत्रमाग कामगारों द्वारा बुना जाता है। वर्तमान में बाजार में मंदी का माहौल होने के बावजूद, अतिरिक्त बिजली छूट और सूत की कीमतों में स्थिरता का लाभ निश्चित रूप से यंत्रमाग व्यवसाय को मिल रहा है। हालांकि, कुछ अन्य मुद्दों पर यंत्रमागधारक चिंतित हैं और उन समस्याओं को भी सरकार द्वारा हल किए जाने की मांग शहर के यंत्रमाग उद्योग से की जा रही है।
स्थानीय वस्त्रोद्योग के इस संतोषजनक स्थिति पर यंत्रमागधारक जागृति संगठन के अध्यक्ष श्री विनय महाजनजी ने कहा कि ‘‘राज्य के कपड़ा उद्योग में प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए इचलकरंजी के यंत्रमागधारकों को कड़ी मेहनत करनी पड़ रही थी। हालांकि, सूत की कीमतों में स्थिरता और बिजली पर अतिरिक्त छूट के लाभ के कारण वर्तमान में बाजार में संतोषजनक स्थिति देखी जा रही है। कपड़े की मांग भी अच्छी है और उत्पादन लागत में कमी आई है।’’
महाराष्ट्र में, चूंकि स्कूली छात्रों की वार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं, इसलिए विवाह समारोहों की खपत धीमी हो गई है। आमतौर पर ये परीक्षाएं 15 अप्रैल तक चलेंगी, जिसके बाद गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही शादी समारोह तेज हो जाएंगे। हालांकि, इस बीच लोग शादी के कपड़े खरीदने के लिए सभी कपड़ा दुकानों पर उमड़ सकते हैं। गर्मी का मौसम अभी शुरू ही हुआ है। इसलिए देखा जा रहा है कि इस सीजन में इसकी खपत बढ़ती जा रही है। चमकीले सफेद, पतले सूती कपड़ों की अच्छी मांग है।
ग्रे कपड़े का उत्पादन महाराष्ट्र के टेक्सटाइल उद्योग का एक प्रमुख हिस्सा है। विशेष रूप से निर्यात बाजार में 2025 में ग्रे कपड़े की मांग में वृ(ि देखी गई है। रेडीमेड गारमेण्ट उद्योग में 2025 के शुरूवाती दौर में उल्लेखनीय वृ(ि देखी गई है। महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे और नासिक जैसे शहरों में फैशन ट्रेंड्स के प्रति जागरूकता बढ़ी है, जिससे डिजाइनर और ब्रांडेड कपड़ों की मांग में वृ(ि हुई है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी रेडीमेड गारमेण्ट्स की बिक्री में उछाल आया है। हालांकि, छोटे उद्योगों को बड़े ब्राण्ड्स के साथ प्रतिस्पर्धा करने में कठिनाई हो रही है।
08-03-2025