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नई दिल्ली/ भारत सरकार ने देश के वस्त्र क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी, नवोन्मेषी और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत वस्त्र केंद्रित अनुसंधान, मूल्यांकन, निगरानी, योजना और स्टार्ट-अप ;टेक्स-रैम्प्सद्ध योजना को वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक छह वर्षों की अवधि के लिए 305 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई है। इस योजना का उद्देश्य अनुसंधान आधारित विकास, डेटा-संचालित नीति निर्माण और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को सशक्त करना है।
टेक्स-रैम्प्स योजना के तहत पांच प्रमुख घटकों पर फोकस किया गया है। पहले घटक के तहत स्मार्ट टेक्सटाइल, सस्टेनेबिलिटी, उत्पादन दक्षता और नई तकनीकों से जुड़े लक्षित अनुसंधान एवं उनके प्रसार को समर्थन दिया जाएगा। दूसरे घटक में क्षेत्रीय निदान, रुझान पूर्वानुमान और आपूर्ति श्रृंखला विश्लेषण जैसे आकलन एवं मूल्यांकन अध्ययन शामिल हैं, जिससे नीति निर्माण अधिक प्रभावी हो सकेगा। तीसरे घटक के अंतर्गत निगरानी एवं सांख्यिकी प्रणाली को मजबूत किया जाएगा ताकि वस्त्र क्षेत्र से संबंधित विश्वसनीय डेटा संग्रह और विश्लेषण संभव हो सके।
चौथे घटक में योजना एवं क्षमता विकास पर जोर दिया गया है। इसके तहत राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय वस्त्र योजनाओं, कार्यशालाओं, आयोजनों और सहयोगात्मक मंचों के माध्यम से विभिन्न हितधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। वहीं पांचवें और अहम घटक के रूप में स्टार्ट-अप एवं नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें उच्च मूल्य एवं निर्यात उन्मुख उद्यमों पर विशेष ध्यान देते हुए इनक्यूबेटर, हैकथॉन और अकादमिक-उद्योग साझेदारी के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके साथ ही सरकार ने राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन ;एनटीटीएमद्ध को भी मजबूती प्रदान की है। आयात प्रतिस्थापन और तकनीकी वस्त्रों व विशेष रेशों की निर्यात क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से इस मिशन को 1,480 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ आगे बढ़ाया गया है, जिसकी अवधि अब 31 मार्च 2026 तक ;समापन अवधि 31 मार्च 2028द्ध बढ़ा दी गई है। कुल परिव्यय में से 1,000 करोड़ रुपये अनुसंधान एवं विकास के लिए निर्धारित हैं।
एनटीटीएम के घटक-1 के अंतर्गत देश के प्रमुख संस्थानों को लगभग 520 करोड़ रुपये की 168 अनुसंधान परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। साथ ही तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में नवप्रवर्तन को बढ़ावा देने के लिए 24 स्टार्टअप्स को कुल 116 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए मंजूरी दी गई है, जिसमें भारत सरकार की हिस्सेदारी 10.79 करोड़ रुपये है। सरकार के अनुसार, इन योजनाओं का नियमित मूल्यांकन नीति आयोग द्वारा विकसित मानक टीओआर के तहत किया जाएगा, ताकि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और निरंतरता को सुनिश्चित किया जा सके।