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पावरलूम पर मार्जिन का दबाव, विंटर-वियर से राहत, यूनिफॉर्म सीजन से उम्मीद
इचलकरंजी/दिसंबर 2025 का महीना स्थानीय पावरलूम और रेडीमेड गारमेंट सेक्टर के लिए मिश्रित संकेतों वाला रहा। एक ओर कड़ाके की ठंड ने ऊनी वस्त्रों की बिक्री में जान फूंकी, वहीं दूसरी ओर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और मुख्य मांग में सुस्ती ने उद्योग को दबाव में रखा। मौजूदा हालात को उद्यमी ‘धैर्य की परीक्षा’ के रूप में देख रहे हैं।
पावरलूम सेक्टर- बढ़ती लागत, घटता मार्जिन
स्थानीय पावरलूम उद्योग इस समय गंभीर मार्जिन क्रंच से गुजर रहा है। स्पिनिंग मिलों द्वारा कॉटन यार्न के दामों में लगातार बढ़ोतरी से उत्पादन लागत बढ़ गई है। बीते 15 दिनों में सूत के भाव लगातार ऊपर गए हैं। कपास की अनियमित आवक और मिलों की परिचालन लागत में वृ(ि को इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है।
हालांकि लागत बढ़ी है, लेकिन ग्रे कपड़े के दाम उस अनुपात में नहीं बढ़ पा रहे। खरीददार ऊंचे भाव स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, जिससे उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी कारण पावरलूम उद्यमी अब भविष्य का स्टॉक बनाने के बजाय ज़रूरत के अनुसार ही सूत खरीद रहे हैं।
रेडीमेड गारमेण्ट सेक्टर में सुस्ती
स्थानीय रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्रियों में भी दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में सुस्ती का माहौल रहा। बड़े रिटेल चेन और थोक व्यापारियों से नए ऑर्डर घटे हैं। दिवाली के बाद का स्टॉक अभी भी पाइपलाइन में फंसा होने से नए उत्पादन की मांग सीमित रही। इसका असर काम की गति पर पड़ा है, जिससे मालिकों और कामगारों दोनों में असंतोष देखा जा रहा है।
विंटर-वियर से बाजार को राहत
दिसंबर की तेज ठंड कपड़ा बाजार के लिए राहत बनकर आई। शॉल, कंबल, स्वेटर और जैकेट की बिक्री चरम पर पहुंच गई। खासतौर पर सोलापुर की चादरों और कंबलों की मांग पड़ोसी राज्यों तक फैल गई है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ऊनी वस्त्रों की अच्छी ग्राहकी देखी जा रही है। व्यापारियों को उम्मीद है कि यदि ठंड जनवरी के अंत तक बनी रहती है तो विंटर स्टॉक पूरी तरह क्लियर हो जाएगा।
शादी-ब्याह के बाजार में मंदी
आमतौर पर दिसंबर विवाह सीजन के लिए सबसे व्यस्त माना जाता है, लेकिन इस साल तस्वीर कुछ अलग रही। भारी साड़ियां, प्रीमियम सूटिंग-शर्टिंग और महंगे लहंगों की मांग कमजोर रही। विशेषज्ञों के अनुसार महंगाई और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने घरेलू बजट पर असर डाला है, जिससे उपभोक्ता खर्च में सतर्कता बरत रहे हैं।
महानगरपालिका चुनाव का असर
इचलकरंजी महानगरपालिका चुनाव ने स्थानीय उद्योग में अस्थायी लेकिन अहम मांग पैदा की है। खादी कपड़े, झंडे, स्कार्फ और टोपी के उत्पादन में तेजी आई है। हालांकि दूसरी ओर कई कारीगर राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के कारण छुट्टी ले रहे हैं, जिससे उत्पादन समय बढ़ गया है।
स्कूल यूनिफॉर्म- उम्मीद की किरण
व्यापारियों की निगाहें अब 2026 के स्कूल यूनिफॉर्म सीजन पर टिकी हैं। नमूनों का प्रदर्शन और बुकिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस साल यूनिफॉर्म सेगमेंट में 15दृ20 प्रतिशत वृ(ि की उम्मीद जताई जा रही है। पीसी मैटी, पी-निट, एंटी-बैक्टीरियल फैब्रिक, इलास्टेन मिश्रित ट्विल-ड्रिल और रिंकल-फ्री ट्रोवाइन जैसी वैरायटी खास पसंद बन रही हैं।
आगे की राह
जनवरी नजदीक आते ही सूत बाजार में संभलकर तेजी का रुख है। नई कपास आवक से कच्चे माल की उपलब्धता बेहतर है, लेकिन कीमतों पर नजर रखना जरूरी है। स्थानीय पावरलूम एसोसिएशन ने उद्यमियों को सतर्क इन्वेंट्री प्रबंधन और गुणवत्ता पर फोकस करने की सलाह दी है।
दिसंबर 2025 उद्योग के लिए चुनौतियों और अवसरों का मिश्रण रहा। विंटर बिक्री और स्कूल यूनिफॉर्म सीजन से उम्मीद बनी हुई है, जबकि व्यापारी फिलहाल ‘देखो और प्रतीक्षा करो’ की नीति अपना रहे हैं।